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Rani ki vava ,रानी की वाव,गुजरात पाटण

rani ki vav ,Gujrat patan a world heritage site | historical stepwell

विश्व के लिए अनमोल धरोहर है यह भारत की 10 वीं  शताब्दी की बनी बावड़ी (वाव) "रानी वाव" गुजरात के पाटण क्षेत्र में स्थित है जिसे UNESCO ने भी समझा और WORLD HERITAGE SITE  की सूची में शामिल किया। यह इतनी सुन्दर बावड़ी है की RBI  ने इसे 100 रुपए के नए नोट पर भी चित्रित किया है। सात मंजिल की बानी रानी वाव (बावड़ी ) को राष्ट्रिय धरोहर घोषित करते हुए आईएएस द्वारा संरक्षित किया गया है। रानी वाव का निर्माण 1063 में चालुक्य वंश के दौरान रानी उदयामती ने करवाया था। यह इतनी बड़ी,गहरी और सुन्दर है की इसे UNESCO ने भारत के सभी बावड़ियों की रानी का ख़िताब भी दिया है। इस बावड़ी को बाहर से देखने पर इसका सम्पूर्ण ढांचा दिखाई देता है जो किसी शंक्वाकार मंदिर की तरह प्रतीत होता है बावड़ी बनाकर जमीनी और बारिश के पानी को संरक्षित करना हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति की एक अनूठी खासियत है। सरस्वती नदी के किनारे बानी चालुक्य वंश के समय की रानी वाव का हर हिस्सा अनगिनत सुन्दर और जीवंत पत्थर पर करि नक्काशी से भरा है जिसके हर माले पर बड़े बड़े गलियारे सुन्दर शिल्पकारी वाले खम्बों के सहारे बनाये गए थे। ऐसा भी बताया जाता है की रानी बावड़ी के सबसे नीचे वाले हिस्से में एक सुरंग के लिए दरवाजा भी है जो कहीं दूर खुलती है जिसे गुप्त रास्ते के तौर पर राजा और उनके परिवार द्वारा इस्तेमाल किया जाता था। इस तरह की शानदार वास्तुकला संरचननाओं को देखकर यह कहना गलत नहीं होगा की बारिश के पानी और जमीन के पानी के संरक्षण और प्रबंधन प्रणाली में माहिर थे 10 वीं -11 वीं शताब्दी के भारतीय।

pic credit :en.wikipedia.org and liamtra.com

 

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