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ratneshwar temple

ratneshwar temple. जिसे leaning temple of वाराणसी भी कहते हैं

काशी और उसके घाटों का हिन्दू धर्म मे बहुत महत्त्व है। काशी को मोक्ष की नगरी भी कहते हैं और हमने अपने बुज़ुर्गों से सुना है की कहते हैं अगर मृत्यु के बाद किसी का अंतिम संस्कार काशी के घाटों पर हो तो उसको मोक्ष अवश्य प्राप्त होता है। वैसे तो शहर मे कई घाट हैं जहाँ हज़ारों लोग प्रतिदिन स्नान या अंतिम संस्कार के लिए आते हैं और यहाँ के सुन्दर घाटों का नौकाओं से भ्रमण भी करते हैं,लेकिन इन्ही सुन्दर घाटों मे से एक है सिंधिया घाट,जिस पर बना है एक बेहद ही आकर्षक मंदिर "रत्नेश्वर महादेव मंदिर" जिसे leaning temple of vaanasi भी कहते हैं। 
इसके निर्माण को लेकर कई धारणाएं हैं जैसे कुछ लोगों का कहना है की इस मंदिर का इतिहास करीब 400 से 300 साल पुराना है. कुछ लोग कहते हैं की इस मंदिर को रानी अहिल्या बाई की दासी रत्ना बाई ने बनवाया था और अहिल्या बाई इसे अपना नाम देना चाहती थीं लेकिन मंदिर का नाम दासी के नाम पर ही पड़ गया जिससे नाराज़ हो कर रानी ने श्राप दे दिया जिस वजह से इस मंदिर मे कभी पूजा नहीं होती।  वहीँ कुछ लोगों का कहना है कि यह 19 वि शताब्दी मे बना था और कुछ लोगों का मानना है कि यह मंदिर 18 वि शताब्दी मे बनवाई गयी इमरती श्रंखला का हिस्सा था। एक और कहानी यह भी सामने आती है जिसके अनुसार 15 वि 16 वि शताब्दी के दौरान मानसिंह नाम के एक युवक ने अपनी माँ के लिए ये मंदिर बनवाया था , यह कह कर कि वह अपनी माँ के दूध का क़र्ज़ उतारना चाहते है और जब उनकी माँ ने ये मंदिर देखा तो श्राप दे दिया की माँ के प्यार का कोई मोल नहीं होता उसे चुकाया नहीं जा सकता और उसी के बाद ये मंदिर जमीन में धस गया। 

घाट के आसपास बने और मंदिरों की तरह पीछे की तरफ न बने होकर यह शिव मंदिर नदी के तट के बिलकुल करीब इस तरह से बना है की जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो मंदिर भी पानी में डूबता जाता है। इस मंदिर का जो मुख्य आकर्षण है वो है इसका थोड़ा सा एक तरफ को झुका हुआ होना, जिसके पीछे कई कहानियाँ बताई जाती है।  जिसके अलावा  एक कारण ये भी हो सकता है की ये मंदिर अपना ही भार नहीं सम्हाल पाया और एक तरफ को मिटटी में धस गया। रत्नेश्वर मंदिर के एक तरफ झुके हुए पानी में डूबे रहने के पीछे कारण चाहे बनाने वाले की गलती थी या किसी का श्राप था यह तो कहना मुश्किल है लेकिन इसका इतने सालों से इस तरीके से झुके हुए होकर पानी में डूबे रहना अपने आप मे एक अजूबा है जिसका आकर्षण विश्व प्रसिद्ध leaning tower of pisa  से कम नहीं! ज़्यादा ही है। भारत मे कई ऐसी ऐतिहासिक प्राचीन इमारतें और मंदिर हैं जो पश्चात देशों की विश्व प्रसिद्ध इमारतों से कई गुना सुन्दर प्राचीन और बेजोड़ कारीगरी से बनी हुई हैं। आवश्यकता है अपनी संस्कृति का मूल्य समझने की और उसका सम्मान करने की.....
अब तय आपको करना है की अहमियत किसे देनी है पश्चात् देश के leaning tower of pisa  को य अपने देश के प्राचीन रत्नेश्वर मंदिर को.....

सन्दर्भ :en.m.wikipedia.org

           www.amarujala.com

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