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hindi kahawaton ke sahi arth, घोड़े पर हिंदी कहावतें

1.घोड़े भैंसे की लाग.दो बड़े आदमियों की टक्कर.

2.घोड़ा को चढ़इया चूक जातराजा को सिपहिया चूक जातधन को धरैय्या चूक जातचूकत नहीं चुगला चुगलखोरी सों.(बुन्देलखंडी कहावत) घोड़े पर चढ़ने वाला घुड़सवार चूक सकता है, राजा का सिपाही चूक सकता है, धन को रखने वाला चूक सकता है, पर चुगलखोर चुगली करने से नहीं चूकता.

3.घोड़ा घास से यारी करेगा तो खायगा क्या.यह एक बड़ी व्यवहारिक सी बात है की घोड़ा घास से दोस्ती नहीं कर सकता, वरना वह खाएगा क्या. कोई डॉक्टर अगर मरीज से फीस न ले तो यह कहावत कही जाएगी.

4.घोड़ा चले चार घड़ीब्याज चले आठ घड़ी.उधार के पैसे का ब्याज दिन दूना रात चौगुना बढ़ता है.

5.घोड़ा चाहिए विदा कोलौटते पे आना.जाने के लिए घोड़े की जरूरत है, जिससे मांगने गए वह कह रहा है कि लौटते पे ले लेना. जरूरत पर चीज़ न देने के लिए बहाना बनाना.

6.घोड़ा दौड़े या घोड़ी दौड़े कौन जाने.बहुत सी बातों का अंदाज दूर से नहीं लगाया जा सकता.

7.घोड़ा पहचाने सवार को.कोई नया सवार जैसे ही घोड़े पर बैठता है घोड़ा उसके हावभाव से तुरंत पहचान लेता है कि सवार कितना काबिल है. ऐसे ही मातहत कर्मचारी नए हाकिम की आदतों को तुरंत भांप लेते हैं.

8.घोड़ा पालूं और पैदल चलूँ.अगर घोड़ा पालने के बाद भी पैदल चलना पड़े तो घोड़ा पालने का क्या फायदा हुआ. (कुत्ता पाले और पहरा दे)

9.घोड़ा भला न लांगड़ारूख भला न झांगड़ा.लंगड़ा घोड़ा अच्छा नहीं होता और पेड़ के नाम पर झाड़ झंखाड़ अच्छा नहीं होता.

10.घोड़ा भेज के वैद बुलाएमर्ज घटा तो पैदल पठाए.काम निकल जाने के बाद कोई नहीं पूछता.

11.घोड़ा है पर सवार नहीं.साधन तो हैं पर उनका उपयोग करने वाला सही व्यक्ति कोई नहीं है.

 12. घोड़ाटट्टूगजगऊपूतमीतधनमालकोऊ संग न जात हैजब लै जिउ निकाल.जब यमराज प्राण लेने आते हैं तो किसी भी प्रकार का धन और मित्र व सम्बन्धी साथ नहीं जाते.

13.घोड़ामर्द और मकौड़ापकड़ने के बाद छोड़ते नहीं.अर्थ स्पष्ट है.

14.घोड़ी नहलाएँ या पानी पिलाएँ.काम करने में बहाने बनाने वालों के लिए. 

15.घोड़े का गिरा संभल सकता हैनजरों का गिरा नहीं.एक बार किसी का विश्वास खो देने पर दोबारा लौट कर नहीं आ सकता.

16.घोड़े का हठ और औरत का हठ एक समानअर्थ स्पष्ट है.

17.घोड़े की दुम बढ़ेगी तो अपनी ही मक्खियाँ उड़ाएगा.क्षुद्र मनोवृत्ति का व्यक्ति उन्नति करेगा तो खुद अपना ही भला करेगा, किसी और काम नहीं आएगा.

18.घोड़े की नालबाजी में गदही पैर बढ़ावे (घोड़े के नाल ठुकती देख मेंढकी ने भी पंजा बढ़ा दिया).घोड़ों के पैर सड़क पर दौड़ने से घिस न जाएं इसके लिए उनके पैर में लोहे की नाल ठोंकी जाती है. घोड़े के नाल ठुकती देख कर गदही या मेंढकी ने भी अपना पैर आगे कर दिया. कोई मूर्ख और कमजोर आदमी बुद्धिमान और शक्तिशाली आदमी की बराबरी करने की कोशिश करे तो यह कहावत कही जाती है. 

19.घोड़े की पूँछ पकड़ूँ क्या दोगेके घोड़ा खुद ही दे देगा.मूर्खतापूर्ण प्रश्न पूछने वालों पर व्यंग्य.

20.घोड़े की लात से घोड़े नहीं मरते.किसी बेईमान के हथकंडों से बेईमानों का नुकसान नहीं होता.

21.घोड़े की सवारी और गठरी सिर पर.कोई व्यक्ति घोड़े की पीठ पर बैठा हो और गठरी अपने सर पर रखे हो वह निपट मूर्ख ही कहा जाएगा.

22.घोड़े की सवारीचलता जनाजा.घोड़े की सवारी खतरनाक होती है.

23.घोड़े को लातआदमी को बात.घोड़े को लात की भाषा ही समझ में आती है (घोड़े को दौड़ाने के लिए एड़ लगाते हैं), जबकि मनुष्य को बातों से समझाया जा सकता है. यहाँ घोड़े से मतलब मूर्ख या नीच आदमी से भी है.

24.घोड़े घोड़े लड़ेंमोची का जीन टूटे.दो व्यक्तियों की लड़ाई में नुकसान किसी तीसरे का हो तो.

25.घोड़े तो असवारों से ही दबते हैंघोड़ा कितना भी शक्तिशाली और उच्छ्रंखल क्यों न हो, अच्छे सवार उसे काबू कर लेते हैं.

26.घोड़े मर गए, गधों का राज आया.योग्य व्यक्ति नहीं रहे, अब मूर्खों का राज है.

27.घोड़े से गिर गिर कर ही घुड़सवार बनता है.चोट खा कर ही आदमी कुशल और मजबूत बनता है.

28.घोड़ों का घर कितनी दूर.यदि आप काम करना चाहते हैं तो साधन कितनी भी दूर क्यों न हो आप उस तक पहुँच जाएँगे, यदि नहीं करना चाहते हैं तो साधन कितनी भी पास क्यों न हो आप बहाने बनाते रहेंगे. इसी प्रकार की दूसरी कहावत है – जहाँ चाह वहाँ राह.

29.घोड़ों का दाना गधों को नहीं खिलाया जाताउत्तम सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए उनके योग्य होना जरूरी है.

30.घोड़ों की शोभा घुड़सवारों से.घोड़ा कितनी भी अच्छी नस्ल का क्यों न हो, उसकी शोभा अच्छे सवार से ही होती है.

information credit :

 डॉ. शरद अग्रवाल (एम.डी.)मेडिसिन
परामर्श चिकत्सक, बरेली, उ.प्र.,भारत

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